ख़तरनाक चंदन तस्कर वीरप्पन

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ख़तरनाक चंदन तस्कर वीरप्पन
ख़तरनाक चंदन तस्कर वीरप्पन

ख़तरनाक चंदन तस्कर वीरप्पन


भारत का मोस्ट वांटेड मैन हुआ करता था, उसने 20 सालों तक तमिलनाडु और कर्नाटक की सरकार को चैन से नहीं बैठने दिया। जिस पर 2000 से अधिक हाथियों और करीब 184 लोगों को जान से मारने का आरोप था और उसके सिर पर 5 करोड़ का इनाम रखा गया था। भारतीय अपराध जगत में दाऊद इब्राहिम को छोड़कर इतना बड़ा इनाम किसी के सर पर नहीं रखा गया।

भारत का मोस्ट वांटेड मैन
भारत का मोस्ट वांटेड मैन

18 जनवरी 1952 को जन्मे वीरप्पन के बारे में कहा जाता है कि, उसने 17 साल की उम्र में पहली बार एक हाथी का शिकार किया था। हाथी को मारने की उसकी फेवरेट तकनीक होती थी उसके माथे के बीचो-बीच गोली मारना। वीरप्पन को मारने के लिए बनाई गई स्पेशल टास्क फोर्स के प्रमुख के विजय कुमार बताते हैं, इनके पास टैलेंट भी था और स्किल्स भी। वहां कई लोगों पास बंदूक बहुत नॉर्मल चीज है। वीरप्पन के खूंखार का आलम यह था कि, एक बार उसने भारतीय वन सेवा के एक अधिकारी पी श्रीनिवास का सिर काट कर उससे अपने साथियों के साथ फुटबॉल खेली थी।

आपने क्रूरता के बहुत से उदाहरण सुने होंगे, लेकिन यह नहीं सुना होगा कि, किसी लुटेरे या डाकू ने अपने आपको बचाने के लिए अपनी नवजात बेटी की बलि चढ़ा दी हो। उसके रोने की आवाज से उसके ठिकाने का पता ना चल जाए वीरप्पन ने कुछ महीनों की अपनी बच्ची की आवाज को हमेशा के लिए बंद करने का फैसला कर लिया।

वीरप्पन राष्ट्रीय स्तर पर कुख्यात हुआ जब उसने 1993 में गुड फ्राइडे के दिन एक पुलिस दल पर घात लगाकर हमल करा और 30 पुलिसकर्मियों को मार डाला। उस पुलिस दल के एक सदस्य अशोक कुमार बताते हैं गोपालकृष्णन के दल को निशाना बनाने के लिए वीरप्पन ने सड़क पर 10-10 फीट की दूरी पर 14 गड्ढे खोद रखे थे, उन गड्ढों में विस्फोटक रखे हुए थे जिनको 12 वॉल्ट की कार बैटरी से जोड़ा गया था, जैसे ही विस्फोट हुआ बस के नीचे की जमीन दहली, 3000 डिग्री सेल्सियस का तापमान पैदा हुआ, आगे जा रही बस हवा में उछली और पत्थरों धातु और कटे-फटे मांस के टुकड़े 1000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जमीन पर आ गिरा। दृश्य इतना भयानक था दूर चट्टान की आड़ में बैठा वीरप्पन भी कांपने लगा और उसका पूरा शरीर पसीने से सराबोर हो गया। थोड़ी देर बाद जब मैं वहां पहुंचा तो मैंने 21 क्षत-विक्षत शवों को गिना। हमने शवों और घायलों को पीछे आ रही बस में रखा लेकिन इस जल्द बाजी में हम अपने एक साथी सुकुमार को वहीं छोड़ आए, क्योंकि वह छिटक्कर कुछ दूरी पर जा गिरा था उसका पता तब चला जब बस वहां से जा चुकी थी कुछ ही देर में उसने दम तोड़ दिया।

सन् 2000 में वीरप्पन ने दक्षिण भारत के मशहूर अभिनेता राजकुमार का अपहरण कर लिया। 100 से अधिक दिनों तक राजकुमार वीरप्पन के चंगुल में रहे । इस दौरान उसने कर्नाटक और तमिलनाडु दोनों राज्य सरकारों को घुटनों पर ला दिया। जून 2001, दिन में 11:00 बजे आईपीएस अधिकारी के विजय कुमार के मोबाइल की घंटी बजी, स्क्रीन पर फ्लैश हुआ अम्मा । उन्होंने जयललिता के फोन को अम्मा के नाम से फीड कर रखा था।

जयललिता ने विजय कुमार को तमिलनाडू स्पेशल टास्क फोर्स का प्रमुख बनाया। एसटीएफ़ के प्रमुख बनते ही के विजय कुमार ने वीरप्पन के बारे में जानकारी जमा करना शुरू कर दिया। पता चला कि, वीरप्पन की आंख में तकलीफ है अपनी मूंछों में रंग लगाते समय उसकी कुछ बूंदे वीरप्पन की आंख में जा गिरी थी।

वीरप्पन के लिए जाल बिछाया गया कि, उसको आंख के इलाज के लिए जंगल से बाहर लाया जाएगा। उसके लिए खास एंबुलेंस का इंतजाम किया गया जिस पर लिखा था एसकेएस हॉस्पिटल सेलम। उस एंबुलेंस में एसटीएफ के दो लोग पहले से ही बैठे थे, इंस्पेक्टर भिलाई तुरई और ड्राइवर सरवन। वीरप्पन ने सफेद कपड़े पहन रखे थे और पहचाने जाने से बचने के लिए उसने अपनी मशहूर हेडलबार मूंछें छोटी कर रखी थी। पूर्व निर्धारित स्थान पर ड्राइवर सरवन ने इतनी जोर से ब्रेक लगाया कि, एंबुलेंस पर बैठे सभी लोग अपनी जगह से गिरगये।

उस के बाद दोनों ऑफिसर एंबुलेंस से कूद के भाग गये। इस के बाद वीरप्पन पर गोलीय चला दी गयी। कुल 338 राउंड चलाए गए आश्चर्य की बात है कि, वीरप्पन को इनमें से सिर्फ दो गोलिया ही लगी।1960 के दशक में जब फ्रांस के राष्ट्रपति दगाल की कार पर 140 गोलियां बरसाई गई थी तो उनमें से सिर्फ 7 गोलीय ही उनकी कार पर लगी थी।

20 साल तक चली ख़तरनाक चंदन तस्कर वीरप्पन की तलाश 20 मिनट में ख़त्म
20 साल तक चली ख़तरनाक चंदन तस्कर वीरप्पन की तलाश 20 मिनट में ख़त्म

इसके बाद एसटीएफ का पूरा दल एक तरह से सकते में आ गया कि, उन्होंने वीरप्पन को खत्म कर दिया है। जैसे ही उन्हें यह एहसास हुआ विजय कुमार को उनके दल ने कंधों पर उठा लिया। विजय कुमार 30 कदमो से स्कूल की सीढ़ियां चढ़ते हुए ऊपर छज्जे पर जा पहुंचे। वहां से उन्होंने मुख्यमंत्री जयललिता को फोन लगाया उनकी सचिव शीला बालाकृष्ण ने फोन उठाया बोली की, मैडम तो सोने के लिए चली गई है विजय कुमार ने कहा मैं जो उनको बताऊंगा उसे सुनकर वह खुश होंगी।