भारत का केन्द्रीय बजट बनाने की प्रक्रिया

केंद्रीय बजट भारत सरकार के द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले वार्षिक बजट को कहते हैं जो देश के सभी क्षेत्रों के विकास के लिए अनुदान की वितरण की एक निश्चित मापदंड निर्धारित करता है। यह बजट देश की आर्थिक स्थिति, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बजट के साथ और अन्य आर्थिक तथ्यों पर आधारित होता है।

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केंद्रीय बजट भारत सरकार के द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले वार्षिक बजट को कहते हैं जो देश के सभी क्षेत्रों के विकास के लिए अनुदान की वितरण की एक निश्चित मापदंड निर्धारित करता है। यह बजट देश की आर्थिक स्थिति, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बजट के साथ और अन्य आर्थिक तथ्यों पर आधारित होता है।

केंद्रीय बजट निम्नलिखित मुख्य अंशों पर ध्यान केंद्रित करता है-

  • राजकोषीय विवरण: इसमें संचय, खर्च, ऋण, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच वितरण आदि संबंधित मुद्दे शामिल होते हैं।
  • आर्थिक स्थिति का विश्लेषण: इसमें विभिन्न आर्थिक पैरामीटर जैसे जीडीपी, वित्तीय वर्ष, आर्थिक अवस्था आदि पर विचार किया जाता है।
  • विभिन्न सेक्टरों के लिए बजट आवंटन: इसमें कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, ऊर्जा, बिजली आदि सेक्टरों के लिए अनुदान आवंटित किया जाता है।
  • अनुसंधान तथा विश्लेषण: देश की आर्थिक नीति को बदलने के फैसलों के लिए संबंधित विस्तृत बजट अनुसंधान तथा विश्लेषण का वर्णन होता है। इसमें विभिन्न आर्थिक बिंदुओं पर विवरण दिया जाता है, जैसे कि देश की निवेश नीति, आर्थिक संकट योजना, आर्थिक विकास के लिए उपलब्ध स्रोतों का विस्तार आदि।
  • नीति और विवरण: सार्वजनिक उद्योग नीति, बाजार संचार, कृषि विकास नीति आदि के बारे में विवरण दिए जाते हैं। इसमें संबंधित विवरण दिए जाते हैं जो बजट के लक्ष्यों तथा संभावित आर्थिक नीति के फैसलों का आधार बनाते हैं।
  • विशेष बजट अनुभाग: बजट के अंतिम भाग में, अन्य विशेष बजट अनुभागों में विस्तृत विवरण दिया जाता है। इसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों में निवेश तथा विकास के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं का विस्तृत विवरण दिया जाता है। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि संरक्षण, पर्यटन और संस्कृति के विभिन्न क्षेत्रों में सरकारी नीतियों और योजनाओं के बारे में भी जानकारी होती है।
  • राजकोषीय विनियमित निर्धारण: अंत में, बजट के अंतिम भाग में सार्वजनिक खजाने की विनियमित निर्धारण तथा व्यय की अनुमति के संबंध में बात की जाती है। इस अंतिम भाग में बजट के सार्वजनिक खजाने की संख्याओं, आय एवं खर्च के विवरण, तथा निजी और सरकारी निवेशों के बारे में भी जानकारी शामिल होती है। अंत में, बजट की सार्वजनिक अधिसूचना और संबंधित दस्तावेजों का जारी किया जाता है।

भारत के बजट बनाने की प्रक्रिया निम्नानुसार होती है-

  • अनुमानित वित्तीय बजट: बजट बनाने की शुरुआत वित्त मंत्री द्वारा की जाती है। वह देश के आर्थिक स्थिति और अन्य संबंधित तथ्यों का विश्लेषण करते हुए एक अनुमानित वित्तीय बजट तैयार करते हैं।
  • मंत्रालयों और निगमो के लिए बजट प्रस्ताव: विभिन्न मंत्रालयों और निगमों को अपने बजट के लिए प्रस्ताव पेश करने के लिए कहा जाता है। उन्हें अपनी आवश्यकताओं के अनुसार विभिन्न सेक्टरों में खर्च करने की अनुमति मिलती है।
  • धनराशि का आवंटन: वित्त मंत्री और उनके टीम द्वारा समझौते करने के बाद, एक निर्णय लिया जाता है कि कितने धनराशि विभिन्न सेक्टरों को दी जाएगी।
  • संसद मे चर्चा: एक उपयुक्त समय पर वित्त मंत्री द्वारा बजट पेश किया जाता है। इसके बाद, संसद के दोनों सदनों में बजट के मुद्दों पर चर्चा की जाती है और उसे मंजूर कर दिया जाता है।
  • खर्च का विवरण: अंततः, बजट के अनुसार विभिन्न संगठनों और विभागों को अपने खर्चों का विवरण प्रस्तुत करना होता है ताकि निधि वितरण में कोई भी अनियमितता न हो।
  • निधि वितरण: इसके बाद, बजट का अंतिम स्वीकृत रूप तैयार किया जाता है और निधि वितरण की शुरुआत की जाती है। देश के बजट में विभिन्न सेक्टरों जैसे कि कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, ऊर्जा, बिजली आदि के लिए खर्च किए जाते हैं जो देश की आर्थिक विकास को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।

बजट से संबंधित जटिल शब्दावली और उनकी परिभाषा निम्नलिखित हैं-

  • फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) – जब एक सरकार के व्यय उसकी आय से अधिक होते हैं, तो उसका फिस्कल डेफिसिट कहलाता है।
  • फिस्कल पॉलिसी (Fiscal Policy) – सरकार द्वारा बजट में अपनी आय और व्यय के आधार पर निर्धारित की गई उन समझौतों व नीतियों को फिस्कल पॉलिसी कहा जाता है।
  • ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (जीडीपी) (Gross Domestic Production (GDP)) – जीडीपी एक देश में उत्पादित सभी सामान और सेवाओं का कुल मूल्य होता है।
  • कैपिटल बजट (Capital Budget) – एक सरकार द्वारा बनाए गए लंबे समय तक असेट्स जैसे कि रोड, बिजली उपकरण, औद्योगिक कंपनियों का निर्माण, नए परियोजनाओं को विकसित करने के लिए निर्धारित धन राशि को कैपिटल बजट कहा जाता है।
  • विकेंद्रीकृत वित्त (Decentralized Finance) – यह वित्त एक स्वतंत्र या निजी संस्था से नहीं, बल्कि सरकार से जुड़े लेनदेन से होता है।
  • अटेंडेड बजट (Attended Budget) – बजट दिखाता है कि सरकार विभिन्न क्षेत्रों में अपनी नीतियों का विवरण कैसे देती है। अटेंडेड बजट एक ऐसा बजट होता है जो वित्त मंत्रालय के अलावा विभिन्न संस्थाओं द्वारा भी बनाया जाता है।
  • डेमॉनेटाइजेशन (Demonatization) – जब कोई सरकार अपनी मुद्रा को अवैध या गलत घोषित करती है और उसे बंद करती है, तो ऐसे कार्रवाई को डेमोनेटाइजेशन कहा जाता है।
  • रिफाइनेंस रेट (Refinance Rate) – रिफाइनेंस रेट एक ऐसी दर होती है जिसे रिफ़ाइनरी बैंकें अपने क्रेडिट लेनदारों से लेती हैं। इस दर को बैंकों द्वारा अपने उद्धारकों के लिए निर्धारित किया जाता है।
  • एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) – एक्साइज ड्यूटी एक विशेष प्रकार की कर है जो बाजार में बिकने वाले उत्पादों पर लगाई जाती है। इस कर को सरकार उत्पादकों से लेती है और इससे उत्पादों के मूल्य में वृद्धि होती है।
  • एनएफएस (NFS) – National Financial Switch भारत के आधिकारिक इंटर-बैंक नेटवर्क है, जो बैंकों के बीच वित्तीय लेनदेनों को संचालित करता है। इस नेटवर्क के द्वारा व्यक्ति बैंक खातों से एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में धन भेज सकते हैं।
  • आयकर (Income Tax) – आयकर सरकार द्वारा जुटाए जाने वाले धनराशि से संबंधित होता है। यह सबसे आम तौर पर व्यक्तिगत और व्यापारिक आय पर लगाया जाता है।
  • वित्तीय वर्ष (Financial Year) – वह समयावधि जिसमें सरकार अपने आर्थिक लक्ष्यों को पूरा करती है। भारत में वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक चलता है।
  • केंद्रीय बजट (Union Budget) – यह सरकार के लिए एक वित्तीय निवेश रणनीति होती है जिसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए निधियों का वितरण होता है।
  • रेवेन्यू (Revenue) – यह सरकार द्वारा आय के स्रोतों से जुटाया गया धन होता है। इसमें से व्यक्तिगत और कंपनी के आय, सेवा शुल्क, जीएसटी, टैक्स और शुल्क शामिल होते हैं।
  • डेब्ट सर्विस (Debt Service) – यह धनराशि होती है जो सरकार द्वारा उधार ली गई होती है। इसमें स्वतंत्र एवं परास्त उधार दोनों शामिल होते हैं। डेब्ट सर्विस का मुख्य उद्देश्य उधार के ब्याज तथा मूल राशि का भुगतान करना होता है।

भारत का केंद्रीय बजट देश की आर्थिक नीतियों को निर्धारित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह देश की विभिन्न क्षेत्रों और विभागों के लिए वित्तीय संसाधनों का निर्धारण करता है जो सरकार के उद्देश्यों को पूरा करने में मदद करता है। केंद्रीय बजट में विभिन्न क्षेत्रों जैसे रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि के लिए वित्तीय निर्धारण होता है। इसके अलावा, बजट में आर्थिक सर्वेक्षण, वित्त मंत्री के भाषण और विभिन्न विवरण शामिल होते हैं। इसलिए, केंद्रीय बजट देश के विकास और आर्थिक संवृद्धि के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।